
उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के मोहल्ला बक्शीपुर से एक प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जहां ITI के छात्र अविचल ने एक बेहद सस्ता और कारगर कन्वर्टर तैयार किया है जो DC करंट को AC करंट में बदल सकता है। इस देसी तकनीक की सबसे खास बात ये है कि इसे महज ₹100 से भी कम खर्च में तैयार किया गया है और यह ग्रामीण इलाकों की बिजली समस्याओं के लिए रिन्यूएबल एनर्जी-Renewable Energy आधारित समाधान बन सकता है।
ग्रामीण समस्याओं का देसी समाधान
अविचल ने बताया कि उनके गांव और आसपास के इलाकों में बिजली की आपूर्ति अक्सर बाधित रहती है। इन क्षेत्रों में लोग अक्सर सोलर बैटरी जैसी DC सप्लाई का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इससे केवल DC आधारित उपकरण ही चल सकते हैं। AC आधारित घरेलू उपकरण जैसे पंखे और बल्ब काम नहीं करते, जिससे ग्रामीणों को काफी असुविधा होती है।
अविचल के इस कन्वर्टर की मदद से अब एक छोटी बैटरी से प्राप्त DC करंट को AC करंट में बदला जा सकता है, जिससे पंखे, बल्ब जैसे उपकरण आसानी से चल सकेंगे।
कैसे करता है काम?
इस कन्वर्टर को बनाने में अविचल ने एक पुराना मोबाइल चार्जर, कुछ तार, मोबाइल की बैटरी और एक 9 वोल्ट का LED बल्ब इस्तेमाल किया। उन्होंने बताया कि AC को DC में बदलना तो तकनीकी रूप से आसान होता है, लेकिन DC को AC में बदलना अपेक्षाकृत जटिल प्रक्रिया होती है। इस प्रोजेक्ट को उन्होंने ऑनलाइन वीडियो की मदद से समझा और अपनी बहन छाया श्रीवास्तव के सुझाव पर इसे बनाना शुरू किया।
कन्वर्टर की खास बात यह है कि यह पूरी तरह से पोर्टेबल है और 5 वोल्ट की बैटरी से भी काम करता है। इसका मतलब है कि इसे किसी भी जगह आसानी से ले जाया जा सकता है और यह बिना भारी बैटरी या महंगे उपकरणों के भी घरेलू रोशनी की जरूरत पूरी कर सकता है।
कम लागत, बड़ा असर
अविचल के इस कन्वर्टर की सबसे बड़ी खासियत इसकी कम लागत है। महज ₹100 से भी कम में तैयार यह डिवाइस उन लोगों के लिए वरदान साबित हो सकती है, जो महंगे इन्वर्टर या सोलर इनवर्टर नहीं खरीद सकते। यह ग्रामीण भारत के उस बड़े हिस्से में उपयोगी हो सकता है जहां बिजली की उपलब्धता अब भी एक चुनौती बनी हुई है।
इस डिवाइस के ज़रिए न सिर्फ घरेलू उपकरण आसानी से चलाए जा सकते हैं बल्कि इसका उपयोग इमरजेंसी लाइटिंग, स्मॉल स्केल इलेक्ट्रिकल प्रोजेक्ट्स और रेन्यूएबल एनर्जी सिस्टम्स में भी किया जा सकता है।
LED बल्ब को घंटों तक जलाने की क्षमता
अविचल ने अपने कन्वर्टर से एक 9 वोल्ट का LED बल्ब भी जलाया, जो कई घंटों तक लगातार जलता रहा। उन्होंने बताया कि यह प्रोजेक्ट खासतौर पर उन इलाकों के लिए उपयोगी है जहां रात के समय सोलर पैनल की ऊर्जा कम हो जाती है या बैकअप की जरूरत होती है। इस कन्वर्टर के जरिए एक छोटी सी बैटरी से भी बल्ब जलाया जा सकता है।
प्रेरणा बनी बहन, सहारा बनी टेक्नोलॉजी
अविचल ने कहा कि इस अनोखे जुगाड़ की प्रेरणा उन्हें उनकी बहन से मिली। छाया श्रीवास्तव ने ही उन्हें सुझाव दिया कि वो कोई ऐसा सिस्टम बनाएं जिससे गांव के लोग रोशनी की समस्या से निजात पा सकें। इसके बाद उन्होंने इंटरनेट और यूट्यूब जैसे माध्यमों का सहारा लिया और लगातार प्रयोग करते हुए इस DC to AC कन्वर्टर को तैयार कर दिखाया।
भविष्य में विस्तार की उम्मीद
अगर इस तकनीक को सही दिशा और समर्थन मिले, तो यह पूरे देश में ग्रामीण इलाकों की बिजली समस्या का किफायती और टिकाऊ समाधान बन सकता है। सरकारी योजनाओं में इसे शामिल कर बड़े पैमाने पर लोगों को लाभ पहुंचाया जा सकता है। इसके साथ ही रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में यह इनोवेशन एक मजबूत विकल्प बन सकता है।
एक छात्र की पहल, लाखों के लिए उम्मीद
बिना किसी बड़ी लैब, रिसोर्स या फंडिंग के अविचल ने जो कर दिखाया है, वह तकनीकी आत्मनिर्भरता की मिसाल है। यह उदाहरण बताता है कि अगर सही दिशा में सोच और प्रयास किया जाए तो आम लोग भी असाधारण काम कर सकते हैं।