
साइबर अपराधियों के लिए सरकारी पहचान और नागरिकता दस्तावेज़ों की जालसाजी करना अब तक कठिन कार्य था। हालांकि, OpenAI के नवीनतम AI मॉडल GPT-4o ने इस प्रक्रिया को सरल बना दिया है, जिससे आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट और वोटर आईडी जैसे दस्तावेज़ों की नकली प्रतियां तैयार करना संभव हो गया है।
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AI तकनीक की प्रगति के साथ, फर्जी दस्तावेज़ों की जालसाजी का खतरा बढ़ रहा है। इसलिए, साइबर सुरक्षा को मजबूत करने और AI के दुरुपयोग को रोकने के लिए उचित कदम उठाने की आवश्यकता है।
फर्जी दस्तावेज़ों का निर्माण
GPT-4o मॉडल को जब एक फर्जी आधार कार्ड बनाने के लिए कहा गया, तो उसने एक ऐसा दस्तावेज़ प्रस्तुत किया जो देखने में असली जैसा प्रतीत होता था। यह मॉडल पैन कार्ड, पासपोर्ट और वोटर आईडी जैसे अन्य दस्तावेज़ भी बना सकता है, जिनकी डिटेल्स और फॉर्मेट एक-दूसरे से मेल खाते हैं।
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प्रसिद्ध व्यक्तियों के दस्तावेज़ों की जालसाजी
जब इस मॉडल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर दस्तावेज़ बनाने को कहा गया, तो प्रारंभ में मॉडल ने सुरक्षा उपायों का हवाला देते हुए मना कर दिया। हालांकि, प्रॉम्प्ट में थोड़े बदलाव के बाद, AI ने एक असली जैसा दिखने वाला वोटर आईडी कार्ड बना दिया, जिसमें नाम और फोटो भी शामिल थे।
पेमेंट रिसिप्ट और शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की जालसाजी
GPT-4o नकली पेमेंट रिसिप्ट भी बना सकता है। उदाहरण के लिए, 100 रुपये के एक Paytm ट्रांजेक्शन की नकली रसीद तैयार की गई, जो असली और नकली के बीच फर्क करना मुश्किल बना देती है। इसके अलावा, यह मॉडल स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की बैचलर डिग्री जैसी फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्र भी बना सकता है।
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साइबर ठगी का बढ़ता खतरा
दस्तावेज़ों की जालसाजी लंबे समय से ठगों का हथियार रही है, जिससे वे लोगों का भरोसा जीतकर उन्हें ठगते हैं। जनरेटिव AI के आगमन के बाद, इसकी पहुंच कई गुना बढ़ गई है, जिससे नकली दस्तावेज़ बनाना पहले से कहीं ज़्यादा तेज़ और आसान हो गया है।
OpenAI के सुरक्षा उपाय
गलत इस्तेमाल से बचाव के लिए, OpenAI का कहना है कि उसने GPT-4o से बनी तस्वीरों में C2PA मेटाडेटा जोड़ा है, जिससे पता लगाना आसान होगा कि कोई फोटो AI द्वारा बनाई गई है या नहीं।