
गुरुग्राम के DLF क्षेत्र में अवैध निर्माण (Illegal Construction) के मामलों पर नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग (Department of Town and Country Planning – DTCP) ने सख्ती दिखाते हुए 2500 मकानों को सील (Seal) करने की तैयारी कर ली है। विभाग द्वारा पहले ही इन मकानों को नोटिस (Notice) जारी किए जा चुके हैं। अब इन पर कार्रवाई की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा रहा है। विभाग ने एक विस्तृत कार्य योजना तैयार की है जिसके तहत क्षेत्र में किए गए अनधिकृत निर्माण को चिन्हित कर त्वरित कार्रवाई की जाएगी।
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अवैध निर्माण पर जीरो टॉलरेंस नीति
DTCP के अधिकारियों का कहना है कि गुरुग्राम में खासकर DLF फेज़ 1, 2 और 3 में कई मकानों में बिना अनुमति के अतिरिक्त निर्माण (Unauthorized Construction) किया गया है। इन निर्माण कार्यों में बेसमेंट को व्यावसायिक उपयोग के लिए किराए पर देना, अतिरिक्त फ्लोर बनाना, और मंजूर नक्शे के खिलाफ काम कराना शामिल है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में अब जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी और किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाएगी।
पहले ही जारी हो चुके हैं नोटिस
DTCP के अनुसार, 2500 से अधिक ऐसे मकान चिन्हित किए गए हैं जिनमें अवैध निर्माण पाया गया है। इन मकान मालिकों को पहले ही नोटिस जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट करने का मौका दिया गया था, लेकिन अधिकांश मामलों में कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। अब विभाग ऐसे सभी भवनों के खिलाफ सीलिंग की प्रक्रिया शुरू करेगा।
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मकान मालिकों को दी गई अंतिम चेतावनी
नियोजन विभाग ने एक बार फिर मकान मालिकों को अंतिम चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि जिन लोगों ने अब तक विभागीय नोटिस का पालन नहीं किया है, उनके खिलाफ सीधा एक्शन लिया जाएगा। विभाग ने यह भी कहा है कि यदि संबंधित मकान मालिक अवैध निर्माण को स्वयं हटा लेते हैं तो सीलिंग की कार्रवाई से बचा जा सकता है।
सीलिंग प्रक्रिया की निगरानी के लिए टीमें गठित
सीलिंग कार्रवाई को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग ने विशेष टीमें गठित की हैं। ये टीमें क्षेत्र में जाकर हर मकान का भौतिक सत्यापन करेंगी और जो निर्माण नक्शे के अनुसार नहीं होगा, उसे सील किया जाएगा। कार्रवाई की रिपोर्टिंग भी डिजिटल माध्यम से की जाएगी जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।
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DLF क्षेत्र में सबसे ज्यादा शिकायतें
गुरुग्राम के DLF फेज़ 1, 2 और 3 में अवैध निर्माण की शिकायतें सबसे ज्यादा आई हैं। ये इलाके प्रीमियम रेजिडेंशियल जोन में आते हैं और यहां नक्शे के अनुसार निर्माण की अनुमति होती है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में मकान मालिकों द्वारा नियमों का उल्लंघन कर अतिरिक्त निर्माण किए गए, जिससे शहरी नियोजन पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। विभाग का कहना है कि अगर समय रहते ऐसे निर्माणों को रोका नहीं गया, तो गुरुग्राम की अव्यवस्थित शहरीकरण की समस्या और गंभीर हो सकती है।
अवैध निर्माण पर कार्रवाई से बढ़ेगा राजस्व
विभाग का यह भी मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से केवल शहरी व्यवस्था ही नहीं सुधरेगी बल्कि विभाग का राजस्व (Revenue) भी बढ़ेगा। जब अवैध निर्माण रोके जाएंगे और लोग नियमों के तहत निर्माण कराएंगे, तो इससे नक्शा पास कराने, कंपाउंडिंग फीस और अन्य शुल्कों से आय में वृद्धि होगी। साथ ही, अवैध रूप से चल रहे वाणिज्यिक उपयोग को भी रोका जा सकेगा।
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भविष्य में भी जारी रहेगी ऐसी कार्रवाई
नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई केवल DLF क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगी। भविष्य में गुरुग्राम के अन्य क्षेत्रों में भी जहां अवैध निर्माण की शिकायतें सामने आएंगी, वहां भी इसी प्रकार की सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभाग का उद्देश्य शहर को एक व्यवस्थित और नियमों के अनुसार विकसित शहरी ढांचे में ढालना है।