
1 अप्रैल 2025 को देशभर में एक ओर जहां एलपीजी सिलेंडर (LPG Cylinder) के दामों में राहत दी गई, वहीं दूसरी ओर डीजल (Diesel Price Hike) की कीमतों में बढ़ोतरी ने आम आदमी की चिंता बढ़ा दी है। खासतौर पर कर्नाटक सरकार के फैसले ने आम जनता को तगड़ा झटका दिया है।
Diesel Price Hike और LPG Cylinder Price Drop के इस दोहरे घटनाक्रम ने जनता के बीच मिश्रित प्रतिक्रिया उत्पन्न की है। जहां एक ओर गैस सिलेंडर सस्ता हुआ, वहीं डीजल महंगा होने से इसका लाभ खत्म होता नजर आ रहा है। आने वाले समय में जरूरी है कि सरकारें आम जनता की आर्थिक स्थितियों को ध्यान में रखते हुए ईंधन की कीमतों पर निर्णय लें।
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एलपीजी सिलेंडर हुआ 41 रुपये सस्ता
ऑयल एंड गैस मार्केटिंग कंपनियों ने अप्रैल की पहली तारीख को 19 किलोग्राम वाले कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दामों में कटौती की। इस कटौती के बाद कॉमर्शियल गैस सिलेंडर 41 रुपये सस्ता हो गया है। यह राहत ऐसे समय पर मिली है जब ईंधन और रोजमर्रा की चीज़ों की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही हैं। हालांकि यह कटौती केवल कॉमर्शियल सिलेंडर पर लागू हुई है, घरेलू उपभोक्ताओं को इसमें कोई राहत नहीं मिली।
कर्नाटक में डीजल पर बढ़ा बिक्री कर
शाम होते ही कर्नाटक से आई एक खबर ने जनता की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। सिद्धारमैया सरकार ने डीजल पर कर्नाटक बिक्री कर (Karnataka Sales Tax – KST) की दर 18.4% से बढ़ाकर 21.17% कर दी है। इस बढ़ोतरी के बाद कर्नाटक में डीजल के दाम में 2 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
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अखिल कर्नाटक पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अनुसार, इस कर वृद्धि के चलते डीजल की कीमतों में 2 से 2.75 रुपये प्रति लीटर तक का असर पड़ेगा। नई दरें 1 अप्रैल 2025 से पूरे राज्य में लागू कर दी गई हैं।
डीजल के बदले हुए दाम: पड़ोसी राज्यों के मुकाबले अंतर
इस कर वृद्धि के बाद कर्नाटक के प्रमुख शहरों में डीजल के नए रेट इस प्रकार रहे:
बेंगलुरु: ₹91.02
होसुर (तमिलनाडु): ₹94.42
कासरगोड (केरल): ₹95.66
अनंतपुर (आंध्र प्रदेश): ₹97.35
हैदराबाद (तेलंगाना): ₹95.70
कागल (महाराष्ट्र): ₹91.07
इन आंकड़ों से साफ है कि पड़ोसी राज्यों की तुलना में कर्नाटक में फिलहाल डीजल की कीमत थोड़ी कम है, लेकिन आने वाले समय में इसके असर से महंगाई और बढ़ सकती है।
डीजल महंगा, महंगाई की नई लहर की शुरुआत?
डीजल की कीमतों में हुई इस बढ़ोतरी से पब्लिक ट्रांसपोर्ट, माल ढुलाई, कृषि क्षेत्र और कई अन्य सेवाओं की लागत में इजाफा तय है। ट्रांसपोर्टेशन महंगा होने से खाद्य वस्तुओं और अन्य उपभोक्ता सामानों की कीमतें भी बढ़ सकती हैं।
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कर्नाटक में पहले ही दूध की कीमतों में 4 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई थी। ऐसे में आम आदमी की जेब पर दोहरी मार पड़ रही है। इससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की आर्थिक स्थिति और अधिक प्रभावित हो सकती है।
सरकार के फैसले पर बढ़ती आलोचना
विपक्ष और आम जनता, दोनों ही सरकार के इस कदम की आलोचना कर रहे हैं। एक ओर जहां सरकार का कहना है कि राजस्व बढ़ाने के लिए यह फैसला जरूरी था, वहीं जनता का कहना है कि इससे उनकी आर्थिक मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के टैक्स वृद्धि से राज्य सरकार को तात्कालिक फायदा तो हो सकता है, लेकिन इसका दीर्घकालिक असर अर्थव्यवस्था और आम जनता पर नकारात्मक रहेगा।
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एलपीजी और डीजल की कीमतों पर भविष्य की संभावना
जहां Renewable Energy और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की बातें की जा रही हैं, वहीं फॉसिल फ्यूल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव आम नागरिकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। सरकार को चाहिए कि वह पेट्रोलियम उत्पादों पर कर नीति में संतुलन बनाए ताकि महंगाई को काबू में रखा जा सके।