
हिमाचल प्रदेश के लाखों मनरेगा मजदूरों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। राज्य सरकार ने पंचायतीराज विभाग के माध्यम से बीपीएल-BPL श्रेणी के मापदंडों में बड़ा बदलाव करते हुए 100 दिन मनरेगा-MGNREGA में कार्य करने वाले मजदूरों को भी इस सूची में शामिल करने का फैसला लिया है। यह कदम ग्रामीण क्षेत्रों में रह रहे गरीब तबके के लिए सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से काफी सहायक साबित हो सकता है।
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हिमाचल प्रदेश सरकार का यह निर्णय उन हजारों परिवारों के लिए आशा की किरण है, जो अब तक बीपीएल सूची से बाहर थे, लेकिन वास्तव में उस श्रेणी में आते हैं। 100 दिन तक लगातार मनरेगा में कार्य करने वालों को इस मापदंड में लाकर सरकार ने एक संवेदनशील और सामाजिक न्यायपूर्ण निर्णय लिया है। अब देखना होगा कि इसे लागू करने की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी और प्रभावी होती है।
1 अप्रैल से शुरू होगी आवेदन प्रक्रिया
पंचायतीराज विभाग ने स्पष्ट किया है कि अब से जिन मजदूरों ने मनरेगा के तहत 100 दिन का कार्य पूरा कर लिया है, वे बीपीएल सूची में शामिल होने के लिए आवेदन कर सकते हैं। यह नई व्यवस्था 1 अप्रैल 2025 से लागू कर दी गई है। डीआरडीए (DRDA) के कार्यकारी परियोजना अधिकारी केएल वर्मा के अनुसार, मजदूरों को आवेदन देने के बाद बीपीएल सूची में शामिल करने की प्रक्रिया तय मानकों और कमेटियों की समीक्षा के आधार पर पूरी की जाएगी।
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हिमाचल प्रदेश में 1,07,907 मजदूरों ने पूरे किए 100 दिन
वर्तमान में हिमाचल प्रदेश में 1,07,907 मजदूरों ने मनरेगा के तहत 100 दिन का कार्यकाल पूरा कर लिया है। जिला वार आंकड़े इस प्रकार हैं:
- बिलासपुर – 2,965
- चंबा – 28,502
- हमीरपुर – 2,851
- कांगड़ा – 8,678
- किन्नौर – 1,147
- कुल्लू – 11,169
- लाहौल और स्पीति – 76
- मंडी – 30,284
- शिमला – 9,933
- सिरमौर – 6,605
- सोलन – 2,350
- ऊना – 3,347
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि सबसे अधिक लाभार्थी मंडी, चंबा और कुल्लू जिलों से होंगे।
मनरेगा योजना की वर्तमान स्थिति
मनरेगा योजना के अंतर्गत हिमाचल प्रदेश में अब तक 15,14,909 जॉब कार्ड जारी किए जा चुके हैं। इससे 7,14,728 हाउसहोल्ड्स को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। खास बात यह है कि इसमें से 6,04,410 महिलाएं हैं, जिन्हें सीधे तौर पर इस योजना के माध्यम से कार्य मिला है।
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राज्य में कुल 3,91,83,154 व्यक्तिगत कार्य दिवस अर्जित किए गए हैं, जिनमें से 2,49,43,244 कार्य दिवस अकेले महिलाओं द्वारा अर्जित किए गए हैं। यह आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि मनरेगा ने महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण रोजगार के क्षेत्र में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है।
बीपीएल सूची में शामिल होने से मिलेंगे कई लाभ
बीपीएल श्रेणी में शामिल होने के बाद मनरेगा मजदूरों को कई सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का सीधा लाभ मिलेगा, जैसे:
- मुफ्त या सस्ती राशन सामग्री
- स्वास्थ्य योजनाओं के तहत मुफ्त इलाज
- प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास सुविधा
- उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन
- बच्चों की शिक्षा में विशेष सहयोग
- छात्रवृत्ति और पेंशन जैसी अन्य योजनाएं
इस फैसले से न केवल मजदूरों को राहत मिलेगी, बल्कि यह ग्रामीण गरीबी को कम करने की दिशा में भी एक ठोस पहल साबित होगी।
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सरकार की पहल और भविष्य की योजना
पंचायतीराज विभाग का यह निर्णय राज्य सरकार की उन कोशिशों का हिस्सा है, जिसके तहत ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और जरूरतमंदों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। आने वाले समय में विभाग इन मापदंडों की समीक्षा कर और अधिक गरीब श्रमिकों को इस योजना से जोड़ने की दिशा में कदम उठा सकता है।