
अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने आगामी चुनावी प्रचार के दौरान एक अहम ऐलान करते हुए व्यापारिक नीतियों में बड़ा बदलाव करने का संकेत दिया है। ट्रंप ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में एक बोर्ड दिखाया, जिसमें अमेरिका द्वारा विभिन्न देशों पर प्रस्तावित नए टैरिफ (Tariff) दरें दर्शाई गईं। इन दरों के मुताबिक, चीन (China) पर 34% टैरिफ और पाकिस्तान (Pakistan) व बांग्लादेश (Bangladesh) से आयात पर भी भारी शुल्क वसूलने का प्लान है।
इस घोषणा के बाद दुनियाभर में व्यापारिक हलकों में हलचल मच गई है, खासकर उन देशों में जिन पर सीधा असर पड़ने की आशंका है। भारत (India) को इस चार्ट में ‘ग्रेट फ्रेंड’ कहकर ट्रंप ने अपेक्षाकृत कम टैरिफ की रियायत दी है।
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डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ नीति का असर केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा। चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों पर सख्ती के साथ-साथ भारत को मिला डिप्लोमैटिक डिस्काउंट यह दर्शाता है कि विश्व राजनीति और व्यापारिक रिश्ते अब केवल व्यापार पर आधारित नहीं रहे, बल्कि यह रणनीतिक सहयोग और प्रतिस्पर्धा का नया युग है।
अमेरिका के टैरिफ चार्ट में किन देशों पर कितना टैक्स?
ट्रंप द्वारा प्रस्तुत चार्ट में विभिन्न देशों पर प्रस्तावित टैरिफ दरें 10% से लेकर 49% तक दर्शाई गई हैं। उनके अनुसार, अमेरिका उन देशों पर औसतन आधा टैरिफ लगा रहा है जितना कि वे देश अमेरिका पर लगाते हैं। यानी, ट्रंप की मंशा है कि व्यापार में “फेयर डील” सुनिश्चित की जाए और अमेरिका को घाटे से बचाया जाए।
इस टैरिफ चार्ट में चीन पर 34% टैरिफ दर्शाया गया है, जो मौजूदा अमेरिकी नीतियों की तुलना में काफी अधिक है। पाकिस्तान और बांग्लादेश से आयात पर भी ट्रंप भारी टैक्स लगाने की बात कह चुके हैं, जो अमेरिकी उद्योगों को घरेलू उत्पादों की ओर प्रेरित करने की रणनीति का हिस्सा है।
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भारत को मिला ‘ग्रेट फ्रेंड’ का दर्जा
ट्रंप ने भारत को “ग्रेट फ्रेंड” कहते हुए टैरिफ दरों में छूट की बात की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत जैसे सहयोगी देशों के साथ व्यापार संतुलित तरीके से किया जाएगा। इसके तहत भारत पर अपेक्षाकृत कम टैरिफ दरें प्रस्तावित की गई हैं।
इस फैसले का उद्देश्य भारत के साथ अमेरिका के रणनीतिक संबंधों को और मज़बूत करना है, खासकर ऐसे समय में जब चीन के साथ अमेरिका के व्यापारिक रिश्तों में तनाव बढ़ता जा रहा है।
टैरिफ नीति का भारत पर असर
हालांकि भारत को छूट मिली है, लेकिन ट्रंप की नीति का असर कुछ सेक्टर्स पर जरूर पड़ेगा। विशेष रूप से टेक्सटाइल (Textile), इलेक्ट्रॉनिक्स (Electronics), और फार्मास्युटिकल (Pharmaceutical) सेक्टर प्रभावित हो सकते हैं।
इसके अलावा, Renewable Energy, इलेक्ट्रिक वाहन (EVs) और टेक्नोलॉजी निर्यात जैसे क्षेत्रों में भारत-अमेरिका व्यापार पर नजर रखनी होगी। अगर टैरिफ में बदलाव आता है, तो ये सेक्टर प्रतिस्पर्धा में पिछड़ सकते हैं।
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वैश्विक व्यापार में नए समीकरण
ट्रंप की इस घोषणा से यह साफ हो गया है कि अगर वह फिर से सत्ता में आते हैं, तो अमेरिका की व्यापारिक नीति अधिक राष्ट्रवादी और सुरक्षा-प्रेरित होगी। इससे WTO और अन्य अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक संगठनों के नियमों पर भी असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) में असंतुलन आ सकता है, और कई देशों को अपनी नीतियों में बदलाव करने पड़ सकते हैं।
विपक्ष की प्रतिक्रिया और भारत में सियासी असर
अमेरिकी टैरिफ नीति पर भारत में भी राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। खासकर विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (INDIA Alliance) पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि भारत को मिली ‘डिस्काउंट’ डिप्लोमैसी से मौजूदा सरकार को लाभ हो सकता है।
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हालांकि, विपक्ष ने ट्रंप की नीति को ‘अनिश्चितता भरी’ और ‘व्यापारिक खतरे’ के रूप में बताया है।