
उत्तर प्रदेश (UP) में बिना रजिस्ट्रेशन के सड़कों पर दौड़ रहे ई-रिक्शा (E-Rickshaw) की बढ़ती संख्या सरकार और प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में करीब 48,000 ई-रिक्शा ऐसे हैं जो बिना किसी वैध रजिस्ट्रेशन या कानूनी दस्तावेजों के रोज़ाना यातायात में लगे हुए हैं। अब इस पर नकेल कसने के लिए पुलिस और परिवहन विभाग ने कमर कस ली है। एक बड़ा अभियान चलाने की तैयारी की जा रही है, जिससे न केवल अवैध वाहनों पर कार्रवाई होगी बल्कि यातायात की व्यवस्था को भी सुधारा जाएगा।
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अवैध ई-रिक्शा का बढ़ता खतरा
प्रदेश में ई-रिक्शा (E-Rickshaw) की संख्या पिछले कुछ वर्षों में तेज़ी से बढ़ी है। यह वाहन कम खर्चीले और पर्यावरण के लिए बेहतर माने जाते हैं, क्योंकि ये रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy) आधारित होते हैं। लेकिन बिना रजिस्ट्रेशन के चलने वाले वाहनों की वजह से कई समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं, जिनमें यातायात अव्यवस्था, दुर्घटनाएं और अपराधों में इनका इस्तेमाल प्रमुख हैं।
48 हजार ई-रिक्शा बिना नंबर प्लेट के
परिवहन विभाग के अनुसार, प्रदेश में लगभग 48,000 ई-रिक्शा बिना पंजीकरण नंबर (Registration Number) के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इनमें से अधिकांश छोटे शहरों और कस्बों में पाए जाते हैं, जहां निगरानी व्यवस्था कमजोर होती है। इन ई-रिक्शा के पास न तो फिटनेस सर्टिफिकेट होता है और न ही ड्राइवर के पास वैध लाइसेंस।
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पुलिस और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई की योजना
उत्तर प्रदेश पुलिस ने अब इस मामले में सख्ती दिखाने का मन बना लिया है। पुलिस और ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट मिलकर संयुक्त अभियान चलाने जा रहे हैं। इस अभियान के तहत ऐसे सभी ई-रिक्शा को चिह्नित किया जाएगा जो बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे हैं। उन्हें या तो रजिस्ट्रेशन कराने के निर्देश दिए जाएंगे या फिर उन्हें जब्त किया जाएगा।
प्रमुख शहरों में होगी कार्रवाई की शुरुआत
कार्यवाही की शुरुआत राजधानी लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, मेरठ और प्रयागराज जैसे बड़े शहरों से की जाएगी। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से छोटे शहरों और कस्बों में यह अभियान फैलाया जाएगा। ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, इन शहरों में ट्रैफिक जाम और सड़क हादसों की बड़ी वजह अवैध ई-रिक्शा हैं।
ड्राइवरों को मिलेगा मौका, फिर होगी कार्रवाई
प्रशासन का कहना है कि उन्हें पहले चेतावनी दी जाएगी और समय दिया जाएगा ताकि वे अपने वाहन का रजिस्ट्रेशन करवा सकें। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर रजिस्ट्रेशन नहीं कराया गया, तो फिर सीधी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें वाहन जब्त करना और भारी जुर्माना लगाना शामिल है।
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सरकार की मंशा: व्यवस्था में लाना और रेवेन्यू बढ़ाना
इस कार्रवाई का एक और मकसद यह भी है कि राज्य सरकार अपने रेवेन्यू (Revenue) में वृद्धि कर सके। जब वाहन रजिस्ट्रेशन में आएंगे तो उनसे टैक्स और फीस के रूप में राजस्व मिलेगा, जो कि राज्य के आर्थिक संसाधनों को मजबूत करेगा। इसके अलावा ई-रिक्शा के संचालन को व्यवस्थित करने से आम नागरिकों की सुरक्षा और सुविधा भी सुनिश्चित की जा सकेगी।
ई-रिक्शा यूनियन की प्रतिक्रिया
ई-रिक्शा यूनियन के कुछ पदाधिकारियों ने इस अभियान का समर्थन किया है, लेकिन उनका कहना है कि सरकार को ड्राइवरों को रजिस्ट्रेशन के लिए सब्सिडी और सरल प्रक्रिया मुहैया करानी चाहिए। उनका मानना है कि कई ई-रिक्शा चालक गरीब वर्ग से आते हैं और वे भारी शुल्क नहीं दे सकते।
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आने वाले दिनों में और सख्त होंगे नियम
परिवहन विभाग संकेत दे चुका है कि आने वाले महीनों में ई-रिक्शा के लिए रजिस्ट्रेशन, फिटनेस, बीमा और ड्राइवर के प्रशिक्षण को अनिवार्य बनाया जाएगा। सरकार इस दिशा में नीति परिवर्तन की ओर बढ़ रही है ताकि ई-रिक्शा का संचालन पूरी तरह वैधानिक और सुरक्षित बन सके।