
शिमला और इसके आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले उपभोक्ताओं को अब पानी के लिए अधिक कीमत चुकानी होगी। शिमला जल प्रबंधन निगम लिमिटेड (एसजेपीएनएल) ने पानी के टैरिफ में वृद्धि कर दी है। गर्मियों की दस्तक से पहले ही यह निर्णय लिया गया है, जिससे आम जनता की जेब पर असर पड़ना तय है।
एसजेपीएनएल के अनुसार, बढ़ती लागत और जल आपूर्ति व्यवस्था के रखरखाव में हो रहे खर्च को देखते हुए टैरिफ में यह बढ़ोतरी की गई है। अब शिमला के निवासी हर महीने पहले से ज्यादा बिल चुकाएंगे।
यह भी देखें: Fake Property Registry:फर्जी रजिस्ट्री से गंवा सकते हैं ज़मीन, ऐसे करें शिकायत और बचाव
शिमला में पानी महंगा होना निस्संदेह उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय है, लेकिन यदि इसे जल प्रबंधन की दीर्घकालिक योजना के हिस्से के रूप में देखा जाए, तो यह जरूरी कदम भी माना जा सकता है। निगम को चाहिए कि वह आम जनता को इस बदलाव के पीछे की वजह स्पष्ट रूप से बताए और जरूरतमंदों के लिए विशेष छूट की व्यवस्था करे।
जल दरों में बढ़ोतरी की वजह क्या है?
शिमला जल प्रबंधन निगम लिमिटेड (SJMPL) ने स्पष्ट किया है कि जल आपूर्ति की मौजूदा प्रणाली को बनाए रखना और भविष्य में सेवाओं को और बेहतर बनाना मुख्य उद्देश्य है। साथ ही, जल स्रोतों से पानी खींचकर उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की प्रक्रिया में काफी खर्च आता है, खासकर बिजली और कर्मचारियों की लागत में वृद्धि के चलते यह कदम जरूरी हो गया।
एसजेपीएनएल ने यह भी बताया कि लंबे समय से टैरिफ में बदलाव नहीं किया गया था, जिससे वित्तीय दबाव बढ़ रहा था। इसलिए अब दरें बढ़ाकर इस असंतुलन को संतुलित करने की कोशिश की जा रही है।
यह भी देखें: चीन-पाक पर भारी टैरिफ, ट्रंप की नई नीति से बढ़ी हलचल, जानें किन देशों पर कितना टैक्स
शिमला में अब कितना देना होगा पानी का बिल?
नई दरों के अनुसार, घरेलू उपभोक्ताओं को अब पहले की तुलना में प्रति किलोलीटर ज्यादा शुल्क देना होगा। हालांकि सटीक आंकड़े एसजेपीएनएल की आधिकारिक अधिसूचना में ही उपलब्ध हैं, लेकिन यह तय है कि यह बढ़ोतरी हर वर्ग को प्रभावित करेगी।
विशेषकर निम्न और मध्यम वर्गीय परिवारों के मासिक बजट पर इसका सीधा असर पड़ेगा। जल आपूर्ति की दरें इस प्रकार तय की गई हैं कि खपत के आधार पर शुल्क में भी बदलाव होगा।
गर्मियों से पहले क्यों लिया गया यह फैसला?
गर्मियों में पानी की मांग कई गुना बढ़ जाती है। एसजेपीएनएल का मानना है कि इस समय टैरिफ बढ़ाने से उपभोक्ताओं में जल संरक्षण की भावना भी विकसित होगी। इससे अनावश्यक जल व्यय पर अंकुश लगाया जा सकेगा।
इसके अलावा, निगम को उम्मीद है कि अतिरिक्त आय से जल व्यवस्था के ढांचे को और मज़बूती दी जा सकेगी।
यह भी देखें: TRAI के निर्देश पर Jio-Airtel-Vi ने शुरू की नई सर्विस, जानें फायदा
बढ़ते टैरिफ से जनता में नाराज़गी
हालांकि निगम की मंशा सुधारात्मक है, लेकिन आम जनता में इस बढ़ोतरी को लेकर नाराज़गी भी देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि पहले से ही महंगाई से जूझ रहे उपभोक्ताओं पर यह अतिरिक्त बोझ है।
स्थानीय निवासियों और व्यापारी संगठनों ने इसे लेकर विरोध जताया है और प्रशासन से पुनर्विचार की मांग की है।
जल प्रबंधन में सुधार की दिशा में कदम
शिमला जल निगम द्वारा यह कदम केवल आर्थिक सुधार की दिशा में नहीं, बल्कि जल प्रबंधन में Sustainability को सुनिश्चित करने के लिए भी उठाया गया है। निगम ने दावा किया है कि आने वाले समय में Smart Water Metering, Rainwater Harvesting और Renewable Energy आधारित पंपिंग सिस्टम पर भी काम किया जाएगा।
इससे पानी की बर्बादी को रोका जा सकेगा और जल स्रोतों पर दबाव भी कम होगा।
यह भी देखें: 5 अप्रैल को छुट्टी तय, DM ने सभी स्कूल और ऑफिस बंद करने का दिया आदेश
आने वाले समय में और क्या बदलाव हो सकते हैं?
सूत्रों के अनुसार, निगम आने वाले दिनों में Water Tariff Slab System को और पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम उठा सकता है। साथ ही, कम खपत वाले उपभोक्ताओं को रियायत देने का भी प्रस्ताव है।
यह देखा जाएगा कि कौन उपभोक्ता पानी की कितनी मात्रा का उपयोग कर रहा है और उसी के अनुसार उसके बिल में बदलाव किया जाएगा। इससे सामाजिक और आर्थिक न्याय भी सुनिश्चित होगा।