बदल गई PPF की ब्याज दरें? अब होगी आपकी ज्यादा कमाई, जानिए नई दरें

अप्रैल-जून 2025 तिमाही में भी Public Provident Fund (PPF) पर 7.1% ही मिलेगा ब्याज! लाखों निवेशकों को उम्मीद थी रेट बढ़ेगी, लेकिन सरकार ने नहीं दी राहत। टैक्स फ्री रिटर्न और सुरक्षित निवेश के बावजूद क्यों नहीं बदला ब्याज? जानिए पूरी स्कीम की डिटेल और क्या अब बदलनी चाहिए आपकी निवेश रणनीति

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Written byRohit Kumar

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बदल गई PPF की ब्याज दरें? अब होगी आपकी ज्यादा कमाई, जानिए नई दरें
बदल गई PPF की ब्याज दरें? अब होगी आपकी ज्यादा कमाई, जानिए नई दरें

केंद्र सरकार ने Public Provident Fund यानी पीपीएफ-PPF स्कीम को लेकर एक अहम फैसला किया है। सरकार ने अप्रैल-जून 2025 तिमाही के लिए इस लोकप्रिय लॉन्ग टर्म निवेश योजना पर मिलने वाली ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया है। यानी निवेशकों को इस तिमाही में भी 7.1 फीसदी सालाना ब्याज ही मिलेगा। यह दर पहले की तरह स्थिर रखी गई है।

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पीपीएफ एक ऐसी स्कीम है जो लंबे समय के लिए निवेशकों को टैक्स छूट के साथ सुरक्षित और स्थिर रिटर्न देती है। आइए जानते हैं इस स्कीम से जुड़ी अहम बातें, ब्याज दर, टैक्स लाभ और निवेश की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से।

सरकार की ओर से हर तिमाही होती है ब्याज दर की समीक्षा

Public Provident Fund एक स्मॉल सेविंग स्कीम है, जिसे केंद्र सरकार चलाती है। सरकार हर तिमाही में सभी स्मॉल सेविंग स्कीम्स की ब्याज दर की समीक्षा करती है और उसके आधार पर नई दरें तय करती है। हालांकि अप्रैल-जून 2025 तिमाही के लिए सरकार ने PPF की ब्याज दर को 7.1% प्रति वर्ष पर बरकरार रखा है। यह दर पिछले कुछ समय से जस की तस बनी हुई है।

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पीपीएफ में निवेश का लॉक-इन पीरियड और मैच्योरिटी

पीपीएफ स्कीम में निवेश करने वालों को एक निश्चित अवधि के लिए अपने पैसे को लॉक करना होता है। इस स्कीम की मैच्योरिटी अवधि 15 साल की होती है। यानी एक बार निवेश शुरू करने के बाद 15 साल तक इसमें योगदान करना होता है। इसके बाद इसे 5-5 साल के ब्लॉक में बढ़ाया भी जा सकता है।

टैक्स फ्री ब्याज और धारा 80C के तहत छूट

पीपीएफ स्कीम की सबसे खास बात यह है कि इसमें मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स फ्री होता है। साथ ही इसमें किया गया निवेश भी आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80C के तहत टैक्स छूट के योग्य होता है। इसका मतलब यह हुआ कि निवेशक न सिर्फ बचत कर सकते हैं, बल्कि टैक्स की छूट का लाभ भी ले सकते हैं।

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मिनिमम और मैक्सिमम निवेश की सीमा

पीपीएफ में निवेश करने के लिए सरकार ने एक न्यूनतम और अधिकतम सीमा तय की है। इसमें कम से कम 500 रुपये सालाना निवेश करना जरूरी होता है। वहीं अधिकतम 1.5 लाख रुपये सालाना तक निवेश किया जा सकता है। यह निवेश एकमुश्त या किश्तों में किया जा सकता है, लेकिन हर वित्तीय वर्ष में निवेश करना अनिवार्य है।

किस्त मिस होने पर पेनाल्टी

अगर कोई निवेशक किसी वित्तीय वर्ष में अपनी न्यूनतम अनिवार्य निवेश राशि जमा नहीं करता है, तो उसकी अकाउंट इनएक्टिव हो सकती है। ऐसे में दोबारा अकाउंट को एक्टिव करने के लिए 50 रुपये की पेनाल्टी और उस साल की बकाया राशि जमा करनी होती है।

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बाजार की अस्थिरता से सुरक्षित

PPF स्कीम की एक बड़ी खासियत यह भी है कि यह शेयर बाजार की अस्थिरता या बैंकों की ब्याज दरों में घट-बढ़ से प्रभावित नहीं होती। यानी निवेशकों को एक सुनिश्चित और स्थिर ब्याज मिलता रहता है, जिससे लंबे समय में एक अच्छा रिटर्न सुनिश्चित होता है।

निवेशकों के लिए सुरक्षित विकल्प

वर्तमान समय में जब मार्केट में अनिश्चितता बनी रहती है, PPF एक ऐसा विकल्प है जिसमें सरकार की गारंटी होती है। यह निवेशकों के लिए सुरक्षित, स्थिर और टैक्स फ्री रिटर्न वाला विकल्प है। खासकर मिडिल क्लास और रिटायर्ड लोगों के लिए यह स्कीम एक भरोसेमंद साधन है।

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अन्य स्मॉल सेविंग स्कीम्स के साथ तुलना

सरकार द्वारा चलाए जा रहे अन्य स्मॉल सेविंग स्कीम्स जैसे NSC (नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट), सुकन्या समृद्धि योजना, वरिष्ठ नागरिक बचत योजना आदि की ब्याज दरों में हाल ही में कुछ बदलाव देखने को मिले हैं। लेकिन PPF की ब्याज दर को फिलहाल स्थिर रखा गया है। इसका कारण इसकी लॉन्ग टर्म स्टेबिलिटी और बड़े पैमाने पर इसका प्रभाव हो सकता है।

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