इन सरकारी योजनाओं पर मंडराया खतरा! सरकार कर रही बड़ी समीक्षा – जल्द बंद होंगी ये योजनाएं

नई रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार अगले वित्त वर्ष में सभी केंद्रीय और प्रायोजित योजनाओं की गहन समीक्षा करने जा रही है। इसका मकसद है फंड्स के बेहतर इस्तेमाल के लिए कुछ योजनाओं को मिलाना या पूरी तरह बंद करना। जानिए कौन-सी योजनाएं हैं निशाने पर और क्या आपका फायदा अब खतरे में है

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Written byRohit Kumar

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इन सरकारी योजनाओं पर मंडराया खतरा! सरकार कर रही बड़ी समीक्षा – जल्द बंद होंगी ये योजनाएं
इन सरकारी योजनाओं पर मंडराया खतरा! सरकार कर रही बड़ी समीक्षा – जल्द बंद होंगी ये योजनाएं

नए वित्त वर्ष 2025-26 की शुरुआत से पहले केंद्र सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। सरकार सभी केंद्रीय और केंद्र प्रायोजित योजनाओं (Centrally Sponsored Schemes – CSS) की व्यापक समीक्षा करने जा रही है। इस समीक्षा का उद्देश्य न सिर्फ योजनाओं की उपयोगिता और कार्यक्षमता का मूल्यांकन करना है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि फंड्स का सही इस्तेमाल हो रहा है या नहीं। इस प्रक्रिया के तहत सरकार यह भी देखेगी कि कौन-सी योजनाएं प्रभावी हैं, किन योजनाओं का प्रदर्शन खराब रहा है और किन्हें मिलाकर या बंद कर दिया जाना चाहिए।

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हर पांच साल में होता है यह रिव्यू, इस बार खर्च और परिणाम पर जोर

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यह समीक्षा प्रक्रिया हर पांच साल में एक बार की जाती है, खास तौर पर नए वित्त आयोग (Finance Commission) के गठन से पहले। इस बार के रिव्यू में खर्च की गुणवत्ता, योजनाओं की आउटपुट और फंड्स के उपयोग के साथ यह भी देखा जाएगा कि कोई योजना राज्य की किसी समान योजना से ओवरलैप तो नहीं कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस रिव्यू का उद्देश्य यह तय करना है कि किन योजनाओं को जारी रखा जाए, किन्हें संशोधित किया जाए, और किन्हें समाप्त कर दिया जाए। सरकार ने सभी नोडल मंत्रालयों से सुझाव मांगे हैं और नीति आयोग को भी यह जिम्मेदारी दी गई है कि वह उन क्षेत्रों की पहचान करे जहां केंद्र और राज्य की योजनाएं एक-दूसरे से मिलती-जुलती हैं।

रिव्यू के प्रमुख पैरामीटर क्या होंगे?

इस बार के मूल्यांकन में कुछ विशेष मापदंडों पर ध्यान दिया जाएगा। उदाहरण के लिए:

  • क्या योजना अपने उद्देश्य को पूरा कर रही है?
  • क्या यह राज्य की किसी समान योजना के साथ दोहराव कर रही है?
  • क्या छोटी योजनाओं को एक बड़ी योजना में मिलाया जा सकता है?
  • क्या किसी योजना को चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जा सकता है?
  • राज्यों का प्रदर्शन कितना प्रभावी रहा है?

सरकार इस प्रक्रिया के तहत उन योजनाओं की पहचान करेगी जो बजट का बोझ बढ़ा रही हैं लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं दे रही हैं।

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2025-26 के लिए टॉप 10 योजनाओं का बजट आवंटन

नए वित्त वर्ष में केंद्र सरकार ने कई प्रमुख योजनाओं को बड़ी राशि आवंटित की है। इनमें सामाजिक सुरक्षा, ग्रामीण विकास और शिक्षा-स्वास्थ्य जैसी योजनाएं शामिल हैं। शीर्ष 10 योजनाएं और उनके बजट इस प्रकार हैं:

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  • मनरेगा (MGNREGA): ₹86,000 करोड़
  • जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission): ₹67,000 करोड़
  • पीएम किसान (PM-KISAN): ₹63,500 करोड़
  • पीएम आवास योजना ग्रामीण: ₹54,832 करोड़
  • समग्र शिक्षा (Samagra Shiksha): ₹41,250 करोड़
  • नेशनल हेल्थ मिशन: ₹37,227 करोड़
  • पीएम आवास योजना शहरी: ₹23,294 करोड़
  • मोडिफाइड इंटरेस्ट सबवेंशन स्कीम: ₹22,600 करोड़
  • सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0: ₹21,960 करोड़
  • न्यू एम्प्लॉयमेंट जेनरेशन स्कीम: ₹20,000 करोड़

नीति आयोग अप्रैल तक रिपोर्ट दे सकता है

नीति आयोग अप्रैल 2025 तक केंद्र को एक रिपोर्ट सौंप सकता है, जिसमें यह सिफारिश होगी कि कौन-सी योजनाएं अपने मौजूदा रूप में जारी रहनी चाहिए और कौन-सी योजनाओं में बदलाव की जरूरत है। यह रिपोर्ट वित्त आयोग को प्रस्तुत की जाएगी, जिसके बाद अंतिम निर्णय लिए जाएंगे।

इस पूरी प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य है फंड्स के सही उपयोग (Efficient Utilization of Funds) को सुनिश्चित करना और प्रभावहीन योजनाओं को बंद करना। इसके अलावा, राज्य सरकारों के साथ समन्वय कर Renewable Energy, स्वास्थ्य, शिक्षा, और रोजगार जैसी प्राथमिकताओं पर विशेष फोकस किया जाएगा।

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कितना है कुल सीएसएस बजट?

Centrally Sponsored Schemes (CSS) के लिए केंद्र सरकार ने 2025-26 में कुल ₹5.41 लाख करोड़ का बजट निर्धारित किया है। वहीं, चालू वित्त वर्ष 2024-25 में यह बजट ₹5.05 लाख करोड़ रखा गया था, जिसे बाद में संशोधित कर ₹4.15 लाख करोड़ कर दिया गया।

सीएसएस में शामिल कुछ प्रमुख योजनाएं हैं:

  • आयुष्मान भारत – पीएम जन आरोग्य योजना (PMJAY)
  • महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA)
  • प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण और शहरी)
  • जल जीवन मिशन (JJM)
  • प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY)

योजनाओं की संख्या में पहले भी हो चुका है बदलाव

मार्च 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक मुख्यमंत्रियों के उप-समूह का गठन किया था, जिसका उद्देश्य केंद्र प्रायोजित योजनाओं का युक्तिकरण करना था। उस समय योजनाओं की संख्या 130 से घटाकर 75 कर दी गई थी। यह प्रक्रिया अब एक बार फिर दोहराई जा रही है, ताकि देश की वित्तीय स्थिति को मजबूत किया जा सके और योजनाओं के ज़रिए बेहतर सामाजिक प्रभाव सुनिश्चित किया जा सके।

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